श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम्
श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम्
A-
A
A+
हि
EN
🕉️
श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम्
Vindhyeshwari Stotram
Vindhyeshwari Stotram is a powerful mantra praising Goddess Vindhyeshwari, a form of Durga. It highlights her role in dispelling sorrow and granting blessings.
Aa
Reading
शेयर करें
पसंदीदा में जोड़ें
🕉
निशुम्भ शुम्भ गर्जनी, प्रचण्ड मुण्ड खण्डिनी । बनेरणे प्रकाशिनी, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥त्रिशूल मुण्ड धारिणी, धरा विघात हारिणी । गृहे-गृहे निवासिनी, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥ दरिद्र दुःख हारिणी, सदा विभूति कारिणी । वियोग शोक हारिणी, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥ लसत्सुलोल लोचनं, लतासनं वरप्रदं । कपाल-शूल धारिणी, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥ कराब्जदानदाधरां, शिवाशिवां प्रदायिनी । वरा-वराननां शुभां, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥ कपीन्द्न जामिनीप्रदां, त्रिधा स्वरूप धारिणी । जले-थले निवासिनी, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥ विशिष्ट शिष्ट कारिणी, विशाल रूप धारिणी । महोदरे विलासिनी, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥ पुंरदरादि सेवितां, पुरादिवंशखण्डितम् । विशुद्ध बुद्धिकारिणीं, भजामि विन्ध्यवासिनीं ॥ दुर्गा चालीसा | आरती: जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी | आरती: अम्बे तू है जगदम्बे काली | महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् | माता के भजन