Omm Jai Jagannath HareIncense, camphor and the beat of jhal and mridang carry this Jagannath aarti, which calls him the well-wisher of devotees and dwells on his endless forms.
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ॐ जय जगन्नाथ हरे
प्रभु जय जगन्नाथ हरे
भक्तों के हितकारी
भक्तों के हितकारी
मंगल सदा करे
ॐ जय जगन्नाथ हरेअगर कपूर बत्ती से आरती तेरी करे
प्रभु आरती तेरी करे
झाल मृदंग बजाएं
झाल मृदंग बजाएं
चारणों मैं सीष धरे
ॐ जय जगन्नाथ हरे
ॐ जय जगन्नाथ हरे
प्रभु जय जगन्नाथ हरे
भक्तों के हितकारी
भक्तों के हितकारी
मंगल सदा करे
ॐ जय जगन्नाथ हरे
रूप अनुप अनेक आपका
देखके सुख पौन्न
प्रभु देखके ऐसे पौन
बहन सुभद्रा संग है
बहन सुभद्रा संग है
और है बाल ताऊ
ॐ जय जगन्नाथ हरे
ॐ जय जगन्नाथ हरे
प्रभु जय जगन्नाथ हरे
भक्तों के हितकारी
भक्तों के हितकारी
मंगल सदा करे
ॐ जय जगन्नाथ हरे
नीलंचनल से आयें को उधर
प्रभु करणे को उद्धार
कृपा बनी रहती है
कृपा बनी रहती है
भक्तों पे सदा अपार
ॐ जय जगन्नाथ हरे
ॐ जय जगन्नाथ हरे
प्रभु जय जगन्नाथ हरे
भक्तों के हितकारी
भक्तों के हितकारी
मंगल सदा करे
ॐ जय जगन्नाथ हरे
सारे जग के स्वामी प्रभु जगन्नाथ तुम हो
प्रभु जगन्नाथ तुम हो
सदा भगतों के सर पे
सदा भगतों के सर पे रखे हात तुम हो
ॐ जय जगन्नाथ हरे
ॐ जय जगन्नाथ हरे
प्रभु जय जगन्नाथ हरे
भक्तों के हितकारी
भक्तों के हितकारी
मंगल सदा करे
ॐ जय जगन्नाथ हरे
महाप्रसाद तुम्हारा जो भी कोई पाये
प्रभु जो भी कोई पाये
तन मन दोनो पवन
तन मन दोनो पवन उनके हो जाये
ॐ जय जगन्नाथ हरे
ॐ जय जगन्नाथ हरे
प्रभु जय जगन्नाथ हरे
भक्तों के हितकारी
भक्तों के हितकारी
मंगल सदा करे
ॐ जय जगन्नाथ हरे
भक्ति भारत आरती शरण मैं अपनी लेकर प्रभु करो उधर
प्रभु करो उधर
भव सागर से हो जाए फिर तो नए पार
ॐ जय जगन्नाथ हरे
ॐ जय जगन्नाथ हरे
प्रभु जय जगन्नाथ हरे
भक्तों के हितकारी
भक्तों के हितकारी
मंगल सदा करे
ॐ जय जगन्नाथ हरे
जगन्नाथ की आरती जो भी नर गई
प्रभु प्रेम सही गये
मन बंचित वर भक्तन
मन बंचित वर भक्तन उनको मिल जाए
ॐ जय जगन्नाथ हरे
ॐ जय जगन्नाथ हरे
प्रभु जय जगन्नाथ हरे
भक्तों के हितकारी
भक्तों के हितकारी
मंगल सदा करे
ॐ जय जगन्नाथ हरे
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